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शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2021

लक्ष्मी पूजन विधि हिंदी में

दोस्तों अलग-अलग कामनाओं की पूर्ति के लिए अलग-अलग देवी-देवताओं का पूजन करने का विधान है । धन प्राप्ति व अन्य सुख समृद्धि प्राप्ति हेतु शास्त्रों में महालक्ष्मी पूजन का विधान बताया गया है । और हर पूजन में एक शुभ मुहूर्त की जरूरत होती है । महालक्ष्मी पूजन के लिए सबसे उत्तम मुहुर्त दीपावली की रात को माना गया है। 
धर्म ग्रंथों में लक्ष्मी पूजन का विस्तार से वर्णन किया गया है । परंतु इस विधान को केवल बड़े-बड़े विद्वान् कर्मकांडी ही कर सकते हैं । यह साधारण मनुष्य के वस की बात नहीं है । अतः मैंने बहुत ही सरल भाषा व संक्षेप में इसे बताने का प्रयत्न किया है । जिससे साधारण व्यक्ति भी लाभ प्राप्त कर सकता है । मुझे उम्मीद है कि यह पोस्ट आपको बेहद पसंद आएगा और आप लाभांवित भी होंगे । 
 दोस्तों ! दीवाली की रात को गणेश , लक्ष्मी , कुबेर महाकाली , महासरस्वती , देहली विनायक तुला व दीपमाला की पूजा की जाती है । दिवाली की रात यंत्र निर्माण व मंत्रों की सिद्धि के लिए बहुत ही प्रशस्त मुहूर्त माना गया है । पुराणों के अनुसार आज ही के दिन समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था अतः इस रात को भगवती लक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए उनकी पूजा की जाती है । दोस्तों किसी भी पूजा विधि में तीन प्रकार के मंत्रों का उच्चारण किया जाता है । सर्वोत्तम विधि में वेद मंत्रों का प्रयोग होता है परंतु जो व्यक्ति वेद मंत्रों का शुद्ध उच्चारण नहीं कर सकते हैं उनके लिए पौराणिक मंत्रों का आदेश दिया गया है । लेकिन जो लोग संस्कृत भाषा नहीं जानते और पुराणों के मंत्रों का भी उच्चारण नहीं कर सकते तो ऐसे लोगों के लिए केवल नाम मंत्र से ही पूजन करने का विधान बताया गया है । अर्थात् जिस देवी या देवता का पूजन आप कर रहे हैं उनका नाम मात्र का उच्चारण करते हुए पूजन कर सकते हैं । यह विधि भी शास्त्रीय विधान में शामिल है कोई मनगढ़ंत नहीं है । जैसे आप लक्ष्मी पूजन कर रहे हैं तो " ओम श्री महा लक्षम्यै नमः " बोलते जाएं और विधि करते जाएं । तो आइए प्रारंभ करते हैं महालक्ष्मी पूजन -
सर्वप्रथम शुद्ध पीले कपड़े पहन कर पीले आसन पर पूरव या उत्तर की ओर मुंह करके बैठ जाएं ।
पूजन की सभी सामग्री अपने आसपास रख लें । सामग्री की लिस्ट भी वीडियो के बीच में ही दे रखी है । फिर पीतल के लोटे में गंगाजल मिश्रित जल भरकर रख लें । अपने सामने चौकी पर पिला आसन बिछाकर उस पर गणेश और लक्ष्मी जी की मूर्ति या फोटो रख लें । साथ में श्री यंत्र , लक्ष्मी यंत्र , कुबेर यंत्र ,सोना , चांदी के आभूषण आदि भी रख ले । लक्ष्मी यंत्र सोने पर चांदी पर या तांबे पर भी बनाए जाते हैं । चावल के ऊपर गाय के घी का दीपक जलाकर पूर्व मुख या उत्तर मुख रख दें । एक थाली या प्लेट में सिंदूर से स्वास्तिक बनाकर सामने रख लें । 
अब सर्वप्रथम चावल और फूल हाथ में लेकर " गंगा मैया को प्रणाम , यमुना मैया को प्रणाम , सरस्वती मैया को प्रणाम और वरुण देव को प्रणाम " ऐसा बोलकर चावल और फूल लौटे के जल में डाल दें ।लोटे को मौली यानी रक्षा सूत्र बांध कर तिलक लगा दे । अब उस जल से "हरि ओम , नमो भगवते वासुदेवाय " इस प्रकार भगवान का नाम लेकर आम का पत्ता या फूल से अपने ऊपर जल छिड़कें । 
तीन बार आचमन करें यानी उस जल का पान करें । 
अपने मस्तक पर केसर चंदन आदि का तिलक लगा ले । 
स्वस्ति वाचन -
फिर हाथ में पुष्प और अक्षत लेकर अपने गुरु भगवान व माता-पिता का ध्यान करते हुए चावल व फूल स्वास्तिक स्वरूप गणेश जी पर चढ़ा दें । 
संकल्प
फिर अर्घे में या हाथ में पुष्प अक्षत चंदन और जल लेकर संकल्प करें -
आज कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष अमावस्या की रात को दीपावली के शुभ अवसर पर सभी अनिष्ट ग्रहों की शांति के लिए , अखंड लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए व मां लक्ष्मी जी की प्रसन्नता के लिए
आमुख गोत्र ( यहां अपने गोत्र का उच्चारण करें और अपने नाम का उच्चारण करें ) मैं यथा शक्ति गणपति , महालक्ष्मी , कुबेर , महाकाली , महासरस्वती , देहली व दीपावली पूजन करूंगा । ऐसा बोलकर जल एक कटोरी में गिरा दें । 
दोस्तों यह विधि मैं केवल सर्वसाधारण लोगों के लिए बता रहा हूं अतः विद्वत जन क्षमा करेंगे ।
अगर श्रद्धालु जन मंत्र उच्चारण पूर्वक पूरी विधि जानना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में हमें कमेंट करके लिखें मैं ।
इसके बाद पूजन की प्रक्रिया प्रारंभ करें । 
ज्योति पूजन
सर्वप्रथम " दीप ज्योत्यै नमः " का उच्चारण करते हुए ज्योति को फूल अक्षत चंदन और जल अर्पण करें , तिलक लगाएं और धूपबत्ती दिखाएं । यह ज्योति की संक्षेप पूजन है । और आगे सभी संक्षेप पूजन में यही विधि अपनाएं ।
गणेश पूजन
फिर " गणेशाय नमः " बोलते हुए गणेश जी के ऊपर जल छिड़के , मौली चढ़ाएं , तिलक लगाएं , चावल फूल चढ़ाएं । धूप अगरबत्ती दिखाएं , नैवेद्य यानी मिठाई चढ़ाएं , फल और दक्षिणा चढ़ाएं और अंत में प्रणाम करें यह गणेश पूजन है ।
कलश पूजन
अब एक दूसरे लोटे या घड़े में गंगा जल व शुद्ध जल डालकर उसमें एक सुपारी , एक सिक्का , चंदन व दूर्वा डाल कर उसमें आम के पत्तों की गुच्ची रखकर उस पर छोटी प्लेट में चावल भर कर रख दें । पानी वाला नारियल लाल कपड़े में लपेटकर उस के ऊपर रख दें । " कलश कुंम्भाय नमः , वरुणाय नमः " बोलते हुए गणेश पूजन की तरह सभी सामग्री कलश के ऊपर चढ़ाएं । 
महालक्ष्मी पूजन
" ओम् श्री महालक्षम्यै नमः " संपूर्ण पूजा में इसी मंत्र का प्रयोग करना चाहिए । इसी मंत्र से सभी सामग्री चढ़ाना चाहिए । सर्वप्रथम हाथ में पुष्प अक्षत लेकर भगवती लक्ष्मी का आवाहन करना चाहिए जैसे ओम् श्री महालक्षम्यै नमः माता लक्ष्मी जी मैं आपका आवाहन करता हूं । ऐसा बोलकर या मन में सोच कर चावल फूल मां लक्ष्मी के चरणों में चढ़ा दे । पुणह " ओम् श्री महालक्षम्यै नमः " इस मंत्र का उच्चारण करते हुए आसन के लिए चावल फूल चढ़ाएं, स्नान के लिए जल का छींटा दें , फिर पंचामृत स्नान के लिए पंचामृत का छींटा दें , दुबारा फिर जल से स्नान कराएं , वस्त्र के लिए मौली चढ़ाएं , तिलक लगाएं , पुष्प अक्षत , फूल की माला , सिंदूर और दूर्वा अर्पण करें , धूप और दीपक दिखाएं , नैवेद्य अर्थात मिष्ठान व विविध पकवानों का भोग लगाएं , मुख शुद्धि के लिए जल का छींटा दें । इसके बाद फल , लोंग इलाइची पान पत्ता या मीठा पान और दक्षिणा अर्पण करें , नमस्कार करें और कपूर की आरती दिखाएं ।
देहली विनायक पूजन
घर मकान दुकान या ऑफिस आदि के दरवाजे के पास बाहर की ओर दीवार पर सिंदूर से स्वस्तिक बना दें शुभ और लाभ लिख दें और फिर चावल और फूल चढ़ाकर तिलक लगाकर दीपक दिखाकर उनकी पूजा करें ।
महाकाली पूजन ( कलम और दवात के रूप में )
एक स्याही से भरी हुई दावत लेकर उस पर सिंदूर से स्वास्तिक बनाकर उस पर मौली लपेटकर लक्ष्मी जी के आगे चावल की ढेर पर स्थापित करें ।" महाकाल्यै नमः " इस मंत्र का उच्चारण करते हुए चावल फूल तिलक और दीपक दिखाकर संक्षेप पूजन करें । इसी तरह एक स्याही वाली नई कलम लेकर उस पर मौली लपेटकर उसकी भी पूजन कर ले ।
महा सरस्वती पूजन ( खाता बही के रूप में) 
इसी तरह खाता बही ,तुला अर्थात तकड़ी या कंडा आदि और तिजोरी यानी गले की भी पूजा करनी चाहिए । इन पर स्वास्तिक का चिन्ह जरूर बनाना चाहिए । 
कुबेर पूजन
मां लक्ष्मी के आगे कुबेर यंत्र को स्थापित करके " ओम कुबेराय नमः " इस मंत्र से पहले की तरह पूजन करें । कुबेर पूजन में लक्ष्मी पूजन वाली सभी सामग्री चढ़ाना चाहिए ।
दीपावली पूजन
एक बर्तन में 5 7 9 11 21 या श्रद्धा के अनुसार तेल के दीपक जलाकर लक्ष्मी जी के सामने पंक्ति वध रखकर संक्षेप विधि से " ओम दीपावल्यै नमः " इस मंत्र से पूजन करें । जनसाधारण चाहे तो यह संपूर्ण पूजन करें अथवा अपनी इच्छा अनुसार गणेश , लक्ष्मी , कुबेर , दीपक और देहली पूजन ही करें। परंतु व्यवसायिक लोगों को संपूर्ण पूजन ही करना चाहिए । हो सके तो किसी विद्वान कर्मकांडी से ही यह संपूर्ण पूजन करवाना चाहिए ।
आरती
5 या 7 बत्तियों वाली ज्योति प्रचंड करके सर्वप्रथम उसके चारों ओर जल का घेरा लगाना चाहिए । फिर बाएं हाथ से गरुड़ घंटा बजाते हुए सर्वप्रथम चार बार मां के चरणों में दो बार नाभि देश में एक बार मुख्य मंडल पर और 7 बार समस्त अंगों में आरती घुमाना चाहिए । इसके बाद शंख में जल भरकर मूर्ति की चारों और घुमा कर अपने ऊपर और अन्य भक्तों के ऊपर उस जल को छिड़कना , आरती लेना , साष्टांग दंडवत करना प्रसाद वितरण करना और अंत में विसर्जन करना चाहिए ‌।