आठ प्रकार
की सिद्धियां
दोस्तों कहा जाता
है कि
हनुमान जी
महाराज आठ
प्रकार की
सिद्धियों और नौ प्रकार की
निधियों के
दाता हैं
। हनुमान
चालीसा में
आया है
अष्टसिद्धि नवनिधि के दाता तो
सवाल है
कि वो
आठ सिद्धियां
और नौ
निधियां कौन-कौन सी
हैं अष्ट
सिद्धियां निम्न लिखित हैं -
1 अणिमा --अणिमा अर्थात्
छोटा ।
इस सिद्धि
के प्रभाव
से कोई
भी जीब
अपने आप
को छोटे
से छोटे
रूप में
परिवर्तित कर सकता है सूक्ष्म
रुप धारण
कर सकता
है ।
2 महिमा --इस सिद्धि
के प्रभाव
से कोई
भी प्राणी
बड़ा से
बड़ा रुप
धारण कर
सकता है
।
3 लघिमा -- इसके प्रभाव
से जीव
बहुत ही
हल्का बन
सकता है
अपने भार
को घटा
सकता है
।
4 गरिमा--गरिमा का
अर्थ भारी
होता है
तो इस
सिद्धी के
प्रभाव से
कोई भी
अपने शरीर
के भार
को मनचाहे
ढंग से
बढ़ा सकता
है ।
5 प्राप्ति --इस सिद्धि
के प्रभाव
से किसी
भी वस्तु
को प्राप्त
किया जा
सकता है
पशु-पक्षियों
की भाषा
को भी
समझा जा
सकता है
और भविष्य
काल की
घटनाओं को
भी देखा
जा सकता
है ।
6 प्राकाम्य -- इस सिद्धि
के प्रभाव
से पृथ्वी
की गहराइयों
में पाताल
तक जाया
जा सकता
है आसमान
में उड़ा
जा सकता
है और
पानी में
अथवा आग
में भी
सुरक्षित चला
जा सकता
है ।
7 ईषित्व -- इस
सिद्धि की
मदद से
दैवीय शक्तियां
प्राप्त होती
है ।
8 वशित्व -- इस सिद्धि
के प्रभाव
से इंसान
जितेंद्रीय हो सकता है मन
पर नियंत्रण
कर सकता
है किसी
भी जीव
जंतु को
अपने बस
में कर
सकता है
।
9 प्रकार की
निधियां
1 पद्म, 2 महापद्म 3 नील,
4 मुकुन्द, 5 नन्द, 6मकर, 7 कच्छप, 8 षंख,
9 खर्व ।
स्ंाग्रह कतर्।
- आचार्य सिया
राम षास्त्री


