मानस के मोती
1 गुरु महाराज के चरणों की
धूली दृष्टि दोषों को मिटाने के लिए उतम
सूरमा है।
2 सत्संग के
बिना ज्ञान नहीं मिलता और
सत्संग परमात्मा की कृपा से
प्राप्त होता है।
3 कोई भी
जात छोटी या बडी नहीं होती कर्म बडा
होता है।
4 संसार के
सभी प्राणियों में परमात्मा का
बास है
इस लिए
सभी पूजा के योग्य हैं।
5 राम चरित मानस वेदों का
सार है।
6 भगवान् के
पषु पक्षि बान्दर और भालू आदि भक्त भी
वंदनीय हैं।
7 नाम सुमिरन करने से सभी
दुख मिट
जाते हैं।
8 गुरु के
ज्ञान के
विना भव
सागर पार
करना असंभव है।
9 निर्गुण और
सगुन अथवा निराकार और साकार में वही अंतर है जो अंतर पानी और वर्फ में है।
10 श्रद्धा से
आलस्य से
या बैर
भाव से
किया गया
सुमिरण भी
हर जगह
कल्याण ही
करता है।
11 होनी अति
बलवान् होती है इसे कोई
टाल नहीं सकता।
12 भगवान् के
भजन में
वाधा डालने वाली संपत्ति ; घर
मकान ; और
परिवार सभी
नष्ट हो
जाएं ।
13 माता-पिता और गुरु की
बात विना ही सोचे समज्ञे मान लेना चाहिए।
14 ग्ुारु की
बातों चर
भरोसा न
करने वाले कभी सुखी नहीं होते।
15 विधाता के
लेख को
कोई मिटा नहीं सकता।
16 विन बुलाए किसी के घर
जाने से
प्यार और
इज्जत दोनो नष्ट हो जाते हैं।
17 जब जब
धर्म में
कमीं आती
है और
पापियों का
बोल बाला बढ़ जाता है
तब भगवान् का अवतार होता है।
18 वही स्त्री पुत्रबती है जिसका पुत्र भगवान् का
भक्त हो
वरना बांज्ञ रहना उत्तम है।
19 जिस राजा के राज्य में
प्रजा दुखी हो वह राजा नरक का भागी होता है।
20 जैसे पानी के विना नदी
और प्राण के विना षरीर का कोई महत्व नहीं होता वैसे ही पति के
विना नारी का जीवन होता है।
21 अपने मित्र के दुख से
दुखी न
होने वाले ब्यक्ति को देखना भी पाप है।
22 मूर्ख नौकर; कंजूस राजा; चरित्र हीन औरत और
कपटी मित्र ये सभी दुख
ही देने वाले होते हैं।
25 बहुत सुख;
बहुत धन;
और बहुत बड़ा परिबार ये
सभी भक्ति में वाधक हैं।
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