Pado kam samjho jyada

रविवार, 3 जून 2018

दुःखी जीवन कारण और निदान

आज का युग विज्ञान का युग है । शिक्षा का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है । अधिकतर लोग शिक्षित हो चुके हैं । आज बड़े बड़े डॉक्टर , वकील , लेखक , कथावाचक एवं ब्रह्म ज्ञानी लोग उत्पन्न हो चुके हैं ,  अनेकों प्रकार की दवाइयां बन चुकी है,  हर प्रकार के सुख साधन उपलब्ध हैं ,प्रतिदिन हजारों कथाएं हो रही है परंतु चिंता का विषय यह है कि इतना कुछ होने के बावजूद भी इंसान का जीवन बद से बदतर होता जा रहा है आखिर क्यों ? इस पर हमें गहराई से चिंतन करना होगा । इसका सही उत्तर है
कलिमल   ग्रसे   धर्म सब , लुप्त      भए   सदग्रंथ ।
 दंभिन्ह निज मति कल्पि करि, प्रकट किए बहु पंथ।।
 भ‌ए लोग सब मोहबस , लोभ     ग्रसे   शुभ  कर्म ।
सुनूं हरिजान ज्ञान निधि , कहउ   कछुक कली धर्म।।
बरन धर्म नहीं आश्रम चारी । श्रुति विरोध रत सब नर नारी ।।
       मानस के  रचनाकार गोस्वामी जी ने बहुत ही सटीक उत्तर इसका दिया है गोस्वामी जी कहते हैं कि पाप का साथी कलयुग ने ज्ञान और वैराग्य आदि सभी सद्गुणों को अपना ग्रास बना लिया है । गीता रामायण और महाभारत आदि जितने भी हमारे सद्ग्रंथ थे वे सभी आज लुप्त होते जा रहे हैं । समाज में इनका अध्ययन अध्यापन लगभग बंद हो चुका है धर्म ग्रंथों का पठन-पाठन तो दूर की बात है ऊपर से लोग बेवजह इनकी निंदा करने लगे हैं । चारों ओर पाखंड का बोलबाला है ऐसे लोगों ने मनगढ़ंत अनेकों प्रकार के धर्म और संप्रदाय चला रखा है जिसका भक्ति के साथ कोई संबंध नहीं है ऐसे लोग ज्ञान भक्ति और वैराग्य से बिल्कुल अनजान हैं । हर जगह पाप का बोलबाला है जबकि सभी जानते हैं कि सुख और शांति का मूल भक्ति है 1

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